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मालदा से रवाना हुई पहली वंदे भारत स्लीपर

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पश्चिम बंगाल के मालदा से आज भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस यह ट्रेन हावड़ा (कोलकाता) से असम के गुवाहाटी स्थित कामाख्या स्टेशन तक चलेगी और पूर्वी भारत को उत्तर-पूर्व से तेज, सुरक्षित और आरामदायक रेल सेवा के माध्यम से जोड़ेगी।

अब तक वंदे भारत ट्रेनों को मुख्य रूप से चेयर कार स्वरूप में संचालित किया जा रहा था, लेकिन लंबी दूरी की रात्रिकालीन यात्रा को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने पहली बार स्लीपर संस्करण तैयार किया है। यह कदम न केवल यात्रियों के अनुभव को नई ऊंचाई देगा, बल्कि देश के दूरस्थ क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी को भी मजबूती प्रदान करेगा।

लंबी दूरी की यात्रा में क्रांतिकारी बदलाव

हावड़ा से गुवाहाटी के बीच की दूरी पारंपरिक ट्रेनों से तय करने में आम तौर पर 18 से 22 घंटे तक का समय लगता रहा है। वंदे भारत स्लीपर के संचालन से इस मार्ग पर यात्रा अवधि में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है। ट्रेन की रफ्तार, एयरोडायनामिक डिजाइन और उन्नत ट्रैक्शन तकनीक इसे सामान्य स्लीपर ट्रेनों की तुलना में कहीं अधिक तेज और स्थिर बनाती है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस ट्रेन में आधुनिक सस्पेंशन सिस्टम, बेहतर ध्वनि-रोधक कोच, जीपीएस आधारित ट्रैकिंग और स्वचालित दरवाजों जैसी सुविधाएं दी गई हैं, जिससे यात्रियों को हवाई जहाज जैसी सहजता का अनुभव होगा।

कोचों में मिलेंगी प्रीमियम सुविधाएं

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को लंबी दूरी और रातभर की यात्रा के अनुरूप डिजाइन किया गया है। इसमें यात्रियों को मिलेंगी:

  • आरामदायक और एर्गोनॉमिक स्लीपर बर्थ

  • बेहतर लाइटिंग और व्यक्तिगत रीडिंग लैम्प

  • चार्जिंग प्वाइंट और USB पोर्ट

  • स्वच्छ, आधुनिक और टच-फ्री वॉशरूम

  • CCTV आधारित सुरक्षा व्यवस्था

  • ऑटोमैटिक फायर सेफ्टी सिस्टम

  • इंफोटेनमेंट और डिजिटल डिस्प्ले

रेलवे का दावा है कि यह ट्रेन पारंपरिक स्लीपर ट्रेनों की तुलना में अधिक शांत, सुरक्षित और उच्च स्तरीय होगी।

पूर्वोत्तर को मिलेगा बड़ा कनेक्टिविटी बूस्ट

हावड़ा से गुवाहाटी का मार्ग पूर्वोत्तर भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर में से एक माना जाता है। इस ट्रेन के शुरू होने से असम सहित उत्तर-पूर्व के राज्यों के लिए तेज संपर्क संभव होगा। व्यापार, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से भी यह ट्रेन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि तेज रेल सेवा से पूर्वोत्तर में निवेश और आवागमन दोनों को बढ़ावा मिलेगा। लंबे समय से इस क्षेत्र में बेहतर और आधुनिक परिवहन सुविधा की मांग उठती रही है।

चुनावी राज्यों में लॉन्च का राजनीतिक महत्व

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल और असम—दोनों राज्यों में इसी वर्ष के अंत में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में मालदा से वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की शुरुआत को राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। केंद्र सरकार लगातार पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को प्राथमिकता देने का संदेश दे रही है।

प्रधानमंत्री के हाथों इस परियोजना का शुभारंभ चुनाव से पहले एक बड़े विकासात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है, जो क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आधुनिक रेल नेटवर्क को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का संचालन भारतीय रेलवे के लिए एक तकनीकी छलांग माना जा रहा है। यह ट्रेन देश में सेमी-हाई स्पीड नाइट ट्रैवल का नया मानक स्थापित कर सकती है। आने वाले समय में अन्य लंबी दूरी के रूटों पर भी ऐसे स्लीपर वर्जन चलाने की तैयारी की जा रही है।

रेलवे सूत्रों के अनुसार, यदि इस ट्रेन को यात्रियों से अच्छा प्रतिसाद मिलता है, तो दिल्ली-मुंबई, मुंबई-बेंगलुरु और चेन्नई-कोलकाता जैसे प्रमुख मार्गों पर भी वंदे भारत स्लीपर को उतारा जा सकता है।

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