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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: Article 142 के तहत कोल इंडिया को दिव्यांग महिला को नौकरी देने का निर्देश

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सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 (Article 142) के तहत अपनी असाधारण संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए एक अहम फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने कोल इंडिया लिमिटेड को निर्देश दिया है कि वह बहुदिव्यांगता से जूझ रही महिला को तत्काल नौकरी प्रदान करे। यह आदेश मंगलवार को सुनाया गया।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने कोल इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि असम के तिनसुकिया जिले स्थित मार्घेरिटा कार्यालय में महिला उम्मीदवार के लिए एक सुपरन्यूमेरी (अतिरिक्त) पद सृजित किया जाए और उस पर तत्काल नियुक्ति की जाए।

अदालत ने कहा कि यह मामला न केवल रोजगार का है, बल्कि दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार, समान अवसर और सामाजिक न्याय से भी सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।

क्या है पूरा मामला?
यह मामला असम के तिनसुकिया जिले के मार्घेरिटा स्थित नॉर्थ ईस्टर्न कोलफील्ड्स, कोल इंडिया लिमिटेड से जुड़ा है। यहां की निवासी सुजाता बोरा ने दृष्टिहीन श्रेणी में आरक्षित उम्मीदवार के रूप में मैनेजमेंट ट्रेनी पद के लिए आवेदन किया था।

चयन प्रक्रिया के तहत सुजाता बोरा ने साक्षात्कार में सफलता भी हासिल की, लेकिन बाद में उन्हें यह कहते हुए अयोग्य घोषित कर दिया गया कि वह केवल दृष्टिहीन ही नहीं हैं, बल्कि Residual Partial Hemiparesis नामक बीमारी से भी पीड़ित हैं, जो बहुदिव्यांगता की श्रेणी में आती है।

इस निर्णय को चुनौती देते हुए मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने इसे अनुचित और भेदभावपूर्ण मानते हुए हस्तक्षेप किया। कोर्ट ने साफ कहा कि दिव्यांगता के आधार पर योग्य उम्मीदवार को रोजगार से वंचित नहीं किया जा सकता और जरूरत पड़ने पर संस्थान को अतिरिक्त पद सृजित करना चाहिए।

यह फैसला दिव्यांगजनों के अधिकारों के संरक्षण और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों में Equal Opportunity सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम मिसाल माना जा रहा है।

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