नए साल की शुरुआत में हुई हल्की बूंदाबांदी किसानों के लिए राहत की सौगात बनकर सामने आई है। यह वर्षा न केवल मौसम को अनुकूल बनाने में सहायक रही, बल्कि खेतों में खड़ी गेहूं की फसल के लिए भी लाभकारी साबित हुई है। लंबे समय से वातावरण में मौजूद प्रदूषण के कण बारिश के साथ घुलकर मिट्टी तक पहुंचे, जिससे गेहूं की फसल को प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन का पोषण मिला।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, दिसंबर महीने में अपेक्षाकृत अधिक तापमान के कारण देसी गेहूं में समय से पहले फुटाव (टिलरिंग) शुरू हो गया था। इससे फसल के कमजोर पड़ने और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही थी।
हालांकि अब तापमान में आई गिरावट, मिट्टी में नमी और धूप के संतुलन से गेहूं की बढ़वार के लिए परिस्थितियां फिर से अनुकूल हो गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम इसी तरह संतुलित रहा, तो फसल का विकास दोबारा सही दिशा में आगे बढ़ेगा और उपज पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
#किसान #गेहूं_की_फसल #बूंदाबांदी #रबी_फसल #मौसम #कृषि_समाचार #FarmersRelief
Author: haryanadhakadnews
MY LOGIN




Users Today : 19
Users Yesterday : 21
Users Last 7 days : 138