ED की बड़ी कार्रवाई ईडी ने दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री सत्येंद्र कुमार जैन से जुड़ी कंपनियों की 7.44 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है और आय से अधिक संपत्ति मामले में 24 अगस्त 2017 को CBI द्वारा दर्ज FIR के बाद शुरू हुई मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है।
आरोप क्या हैं?
CBI ने सत्येंद्र जैन और उनकी पत्नी पूनम जैन पर आरोप लगाया था कि दिल्ली सरकार में मंत्री रहते हुए (14 फरवरी 2015 से 31 मई 2017) उन्होंने अवैध रूप से संपत्ति अर्जित की। इस मामले में 3 दिसंबर 2018 को चार्जशीट दाखिल की गई थी।
ईडी जांच में सामने आया:
ईडी ने अपनी जांच में पाया कि नवंबर 2016 में नोटबंदी के बाद, सत्येंद्र जैन के सहयोगी अंकुश जैन और वैभव जैन ने 7.44 करोड़ रुपये नकद बैंक में जमा किए। इनकम डिस्क्लोजर स्कीम (IDS) के तहत चार कंपनियों—अकिंचन डेवलपर्स, पर्यस इन्फोसॉल्यूशंस, मंगलायतन प्रोजेक्ट्स और इंडो मेटल इम्पेक्स—के खातों में 16.53 करोड़ रुपये की आय/संपत्ति पर उन्होंने दावा किया। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि ये कंपनियां वास्तव में सत्येंद्र जैन के नियंत्रण और स्वामित्व में थीं।
इनकम टैक्स विभाग और दिल्ली हाई कोर्ट ने भी अंकुश जैन और वैभव जैन को सत्येंद्र जैन के लिए बेनामी संपत्ति धारक माना था। इससे पहले, ईडी ने 31 मार्च 2022 को सत्येंद्र जैन की कंपनियों की 4.81 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था। यह नवीनतम कार्रवाई उसी जांच का अगला चरण है।
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Author: haryanadhakadnews
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