पानीपत की समालखा और हिसार की बरवाला नगर पालिका को नगर परिषद का दर्जा दिए जाने के बाद अध्यक्ष और पार्षदों के शेष कार्यकाल को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। दर्जा बढ़ाए जाने के चलते दोनों नगर निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधियों के पांच साल के कार्यकाल पर कानूनी पेंच फंसता नजर आ रहा है।
सरकारी अधिसूचना के अनुसार, बरवाला नगर पालिका को 26 दिसंबर को और समालखा नगर पालिका समिति को 12 अगस्त को नगर परिषद में अपग्रेड किया गया था। जबकि दोनों ही नगर पालिकाओं में जून 2022 में आम चुनाव कराए गए थे। इस स्थिति में निर्वाचित अध्यक्ष और पार्षदों का अभी लगभग डेढ़ वर्ष का कार्यकाल शेष है।
नगर निकायों के दर्जा परिवर्तन के बाद यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या मौजूदा निर्वाचित प्रतिनिधि अपना शेष कार्यकाल पूरा कर पाएंगे या फिर नए सिरे से चुनाव कराए जाएंगे। इसी संवैधानिक और कानूनी पहलू को लेकर मामला अब उच्च स्तर तक पहुंच गया है।
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के अधिवक्ता और म्युनिसिपल कानून के जानकार हेमंत कुमार ने इस विषय को गंभीर बताते हुए राज्यपाल, मुख्यमंत्री, शहरी निकाय विभाग के मंत्री, विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, महानिदेशक और राज्य निर्वाचन आयुक्त को अभिवेदन भेजा है। उन्होंने नगर परिषद बनने के बाद निर्वाचित प्रतिनिधियों के कार्यकाल को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।
मामले पर राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग के रुख का इंतजार किया जा रहा है, क्योंकि इसका सीधा असर स्थानीय निकायों की प्रशासनिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर पड़ेगा।#Samalkha
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Author: haryanadhakadnews
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