वैश्विक स्तर पर बढ़ते व्यापारिक तनावों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था अपनी मजबूती बनाए हुए है। विश्व बैंक ने मंगलवार, 13 जनवरी को जारी आकलन में कहा है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल बना रहेगा।
विश्व बैंक के अनुसार, भारत की आर्थिक रफ्तार के पीछे सबसे बड़ी वजह मजबूत घरेलू मांग है। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 7.2 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
दक्षिण एशिया की ग्रोथ में भारत की अहम भूमिका
विश्व बैंक की ताजा Global Economic Prospects Report में कहा गया है कि भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति ने न सिर्फ देश की ग्रोथ को गति दी है, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी सहारा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण एशिया की अर्थव्यवस्था में 7.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें भारत का योगदान सबसे अहम रहा है।
हालांकि, इस रिपोर्ट में पाकिस्तान और अफगानिस्तान को दक्षिण एशिया के आंकड़ों में शामिल नहीं किया गया है। विश्व बैंक ने इन दोनों देशों को मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका (MENA) क्षेत्र की श्रेणी में रखा है।
घरेलू मांग बनी ग्रोथ की रीढ़
विश्व बैंक के आकलन के अनुसार, भारत की आर्थिक मजबूती की मुख्य वजह देश के भीतर लगातार बढ़ रही घरेलू मांग है। इसके पीछे टैक्स नीतियों में किए गए सुधार और संरचनात्मक बदलावों की अहम भूमिका बताई गई है। इन सुधारों के चलते खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में आय स्तर में सुधार हुआ है, जिससे खपत बढ़ी और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रुझान बरकरार रहता है, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में और अधिक मजबूत भूमिका निभा सकता है।
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Author: haryanadhakadnews
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