भारतीय रेलवे में एक गंभीर और चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सम्मान और सेवाओं की स्मृति के रूप में प्रदान किए गए सोने की परत चढ़े तथाकथित “चांदी” के सिक्के/पदक वास्तव में चांदी के नहीं, बल्कि मुख्य रूप से तांबे के बने पाए गए हैं। जांच रिपोर्ट ने रेलवे की आंतरिक व्यवस्था और खरीद प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
एनएबीएल-मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला और एक सरकारी लैब में कराई गई जांच में पुष्टि हुई है कि इन पदकों में चांदी की मात्रा महज 0.23 प्रतिशत है, जबकि शेष हिस्सा तांबा पाया गया। रिपोर्ट के अनुसार, पदकों पर केवल ऊपर से पतली परत चढ़ाई गई थी, जिससे वे देखने में चांदी जैसे प्रतीत होते थे, लेकिन उनकी वास्तविक धातु संरचना इससे बिल्कुल अलग है।
यह कथित धोखाधड़ी पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल से जुड़ी बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023 से 2025 के बीच सेवानिवृत्त हुए हजारों कर्मचारियों को ये पदक प्रदान किए गए। सेवानिवृत्त कर्मियों के सम्मान से जुड़े इस मामले ने रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
सूत्रों का कहना है कि प्रयोगशाला रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले की उच्चस्तरीय जांच की तैयारी की जा रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित आपूर्तिकर्ताओं और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई संभव है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों के संगठनों ने भी इस मामले में जवाबदेही तय करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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Author: haryanadhakadnews
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