बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की 227 सीटों वाली परिषद में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के गठबंधन को स्पष्ट बहुमत हासिल होने के बावजूद भी शहर के अगले मेयर की कुर्सी को लेकर सस्पेंस बरकरार है।
हालांकि महानगरपालिका नियमों के अनुसार यह अनिवार्य नहीं है कि सबसे बड़ी पार्टी को ही मेयर का पद मिले, इतिहास बताता है कि बहुमत पाने वाले गठबंधनों की ही मेयर सीट पर प्राथमिकता रही है। फिर भी इस बार मुंबई की स्थानीय राजनीति में मेयर चयन को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
भाजपा ने बीएमसी चुनाव में 89 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि शिंदे गुट वाली शिवसेना ने 29 सीटें पाई हैं। राजनैतिक समीकरणों में इस गठबंधन को कुल 118 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत मिला है, लेकिन मेयर पद के लिए अभी तक किसी फाइनल दावेदार का नाम तय नहीं हुआ है।
इसी बीच उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) 65 सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर सामने आई है। पिछली बार की मेयर किशोरी पेडनेकर, जो शिवसेना से थीं, ने इस बार भी अपनी सीट जीत ली है। पेडनेकर के नेतृत्व और राजनीतिक अनुभव को देखते हुए भी सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर चर्चा चल रही है कि मेयर पद को लेकर कौन-सा चेहरा आगे आएगा।
विश्लेषकों का मानना है कि महायुति के भीतर सीटों के अनुपात, सामंजस्य और स्थानीय समीकरणों के आधार पर मेयर का नाम तय होगा। भाजपा और शिंदे गुट के बीच समझौते के अलावा उद्धव गुट के साथ संभावित सहयोग की तरह के राजनीतिक गतिशीलता भी सत्तारूढ़ गठबंधन के निर्णय को प्रभावित कर सकती हैं।
बीएमसी के मेयर का पद सिर्फ औपचारिक नहीं है, बल्कि यह मुंबई नगर निगम के प्रशासन और दिशा-निर्देशों में अहम भूमिका निभाता है। इसलिए इस पद को लेकर राजनीतिक दलों के बीच विचार-विमर्श और चर्चा तेज है।
अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं होने के बीच राजनीति जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में महायुति के बीच अंतिम बातचीत और फाइनल सीट वितरण के आधार पर मेयर का चेहरा तय हो जाएगा।
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Author: haryanadhakadnews
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