मुंबई की बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के 227 वार्डों के लिए हुए चुनावों के नतीजे पूरी तरह सामने आ चुके हैं। इस बार के परिणामों ने शहर की सियासत में बड़ा बदलाव दर्ज किया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि भाजपा और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के गठबंधन ‘महायुति’ ने कुल 118 वार्ड जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है।
बहुमत के लिए जरूरी आंकड़ा 114 था, जिसे महायुति ने आराम से पार कर लिया। इन नतीजों को मुंबई की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि बीएमसी पर करीब तीन दशक तक अविभाजित शिवसेना और ठाकरे परिवार का वर्चस्व रहा था।
भाजपा का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
भाजपा ने इस चुनाव में 89 वार्ड जीतकर अपना अब तक का सबसे मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। पार्टी न केवल सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी, बल्कि नगर निगम में सत्ता के केंद्र में भी पहुंच गई। भाजपा को शहर के उपनगरीय इलाकों, गुजराती बहुल क्षेत्रों और मध्यम वर्गीय वोटरों से व्यापक समर्थन मिला।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केंद्र और राज्य में सत्ता में होने का फायदा भाजपा को सीधे तौर पर मिला। साथ ही, शिवसेना के विभाजन के बाद पारंपरिक मराठी वोटों में बंटवारे से भी भाजपा को लाभ पहुंचा।
महायुति का स्पष्ट बहुमत
भाजपा (89) और शिवसेना के शिंदे गुट (29) ने मिलकर कुल 118 वार्डों में जीत दर्ज की। यह आंकड़ा बीएमसी में स्थिर सरकार के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। महायुति की इस जीत को महाराष्ट्र की राजनीति में शिंदे-भाजपा समीकरण की मजबूती के रूप में भी देखा जा रहा है।
बीएमसी जैसी देश की सबसे धनी नगर निकाय पर नियंत्रण हासिल करना महायुति के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर बड़ी सफलता मानी जा रही है।
ठाकरे गुट को बड़ा झटका
उद्धव बालासाहेब ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने 65 सीटें जीतीं। पार्टी निगम में दूसरी सबसे बड़ी ताकत तो बनी रही, लेकिन सत्ता से बाहर हो गई। यह परिणाम ठाकरे परिवार के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय तक बीएमसी को शिवसेना का गढ़ माना जाता रहा है।
मराठी वोट बैंक के विभाजन और भाजपा-शिंदे गठबंधन की आक्रामक रणनीति ने यूबीटी की स्थिति कमजोर कर दी।
कांग्रेस और अन्य दलों का प्रदर्शन
कांग्रेस ने 24 वार्डों में जीत दर्ज की, लेकिन पार्टी का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा। वहीं, एआईएमआईएम ने 8 सीटें जीतकर मुस्लिम बहुल इलाकों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) को 6 वार्डों में सफलता मिली, जो सीमित लेकिन महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अन्य छोटे दलों में:
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एनसीपी: 3
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समाजवादी पार्टी: 2
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एनसीपी (एसपी): 1
इन दलों की भूमिका निगम में सीमित रहेगी।
मुंबई की सत्ता में बड़ा बदलाव
बीएमसी के परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मुंबई की पारंपरिक राजनीति अब नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। जहां पहले शिवसेना का एकछत्र राज था, वहीं अब भाजपा-शिंदे गठबंधन शहर की प्रशासनिक बागडोर संभालेगा।
आने वाले समय में बीएमसी की नीतियों, ठेकों, शहरी विकास और मराठी बनाम गैर-मराठी राजनीति पर इन नतीजों का व्यापक असर देखने को मिल सकता है।
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Author: haryanadhakadnews
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