राज्यसभा सांसद और इंफोसिस फाउंडेशन की अध्यक्ष सुधा मूर्ति ने देश के विभाजन को लेकर भावुक टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि भारत के बंटवारे का इतिहास नई पीढ़ी को अवश्य पढ़ाया जाना चाहिए, ताकि वे समझ सकें कि यह घटना कितनी पीड़ादायक और गलत थी तथा भविष्य में ऐसी परिस्थिति दोबारा न बने।
सुधा मूर्ति ने उन परिवारों के दर्द को याद किया, जिन्हें विभाजन के दौरान अपने घर-बार छोड़कर आज के पाकिस्तान और बांग्लादेश से भारत आना पड़ा। उन्होंने कहा कि लाखों लोगों का जबरन विस्थापन मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक था, जिसे भुला देना आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय होगा।
उन्होंने विभाजन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस व्यक्ति को भारत की संस्कृति, भाषाओं और यहां के लोगों की वास्तविकता का ज्ञान तक नहीं था, उसने केवल नक्शे पर एक रेखा खींचकर जमीन को बांट दिया और लोगों से कह दिया कि अब यह उनका देश नहीं रहा।
मूर्ति ने इस पीड़ा को व्यक्तिगत उदाहरण से समझाते हुए कहा कि यदि कोई उनसे कहे कि कर्नाटक अब उनका नहीं रहा और वह विदेशी भूमि है, तो यह उनके लिए असहनीय होगा। यही दर्द विभाजन के समय करोड़ों भारतीयों ने महसूस किया था।
उन्होंने जोर देकर कहा कि इतिहास को सिर्फ तारीखों के रूप में नहीं, बल्कि उसके सामाजिक और मानवीय प्रभावों के साथ पढ़ाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, बंटवारे की सच्चाई बच्चों तक पहुंचाना राष्ट्रीय चेतना और एकता को मजबूत करने के लिए आवश्यक है।
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Author: haryanadhakadnews
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