प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की राजग सरकार की जन कल्याणकारी और सामाजिक सुरक्षा नीतियों ने पिछले दशक में देश की तस्वीर बदल दी है। रिपोर्टों के अनुसार, पिछले दस वर्षों में लगभग 25 करोड़ भारतीय बहुआयामी गरीबी से बाहर आए हैं। इसका अर्थ यह है कि बड़ी संख्या में लोगों का जीवन स्तर बेहतर हुआ और उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच मिली।
इस उपलब्धि में डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (डीबीटी) जैसी पहलें अहम भूमिका निभा रही हैं। डीबीटी के जरिए पिछले नौ वर्षों में करीब 28 लाख करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचाए गए। इससे न केवल सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर और पारदर्शी रूप से लोगों तक पहुँचा, बल्कि भ्रष्टाचार और लापरवाही की संभावना भी कम हुई।
विशेष रूप से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में गरीबी की दर में महत्वपूर्ण कमी आई है। विश्व बैंक की हालिया रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है कि अत्यधिक गरीबी में आई यह तीव्र गिरावट व्यापक स्तर पर हुई है। ग्रामीण इलाकों में कृषि, रोजगार और सामाजिक योजनाओं के प्रभाव से गरीबी घटती रही, वहीं शहरी क्षेत्रों में रोजगार और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं ने गरीब और मध्यम वर्ग की जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाने में योगदान दिया।
सरकार की नीतियों ने समावेशी विकास को प्राथमिकता दी है। इसके तहत स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, महिला सशक्तिकरण और आर्थिक सहायता जैसी योजनाओं को विस्तार दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में केंद्र सरकार सामाजिक सुरक्षा कवरेज का और विस्तार कर सकती है, जिससे और अधिक लोगों को लाभ मिलेगा।
इस प्रकार, मोदी सरकार की पहलें न केवल आर्थिक सुधारों में बल्कि सामाजिक न्याय और समानता के दृष्टिकोण में भी निर्णायक रही हैं। यह देश में गरीबी उन्मूलन और समावेशी विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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Author: haryanadhakadnews
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